50 घंटे बाद खुद तैरकर ऊपर आया सोनू का शव, SDRF की कार्यप्रणाली पर सवाल
रतलाम के प्रसिद्ध कालिका माता मंदिर परिसर स्थित झाली तालाब में डूबे 24 वर्षीय सोनू (पिता रंजन सिंह, निवासी ग्राम सालेरा, जिला रायसेन) का शव आखिरकार 50 घंटे बाद खुद-ब-खुद पानी की सतह पर आ गया। रविवार तड़के करीब 3 बजे सोनू का शव बरामद हुआ, जिसके बाद एसडीआरएफ (SDRF) की टीम ने केवल मौके पर पहुंचकर उसे तालाब से बाहर निकाला और कब्जे में लिया। इस घटना ने आपदा प्रबंधन टीम को मिलने वाली ट्रेनिंग और इस्तेमाल की जाने वाली टेक्नोलॉजी की पोल खोलकर रख दी है। जब असल जरूरत पड़ी, तब पूरा सर्च ऑपरेशन और सिस्टम दो दिनों तक पूरी तरह नाकाम साबित हुआ।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की संवेदनहीनता
सर्च ऑपरेशन के पूरे 50 घंटों के दौरान मौके पर कोई भी जिम्मेदार जनप्रतिनिधि, कलेक्टर, एसडीएम या वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पीड़ित परिवार को सांत्वना देने नहीं पहुंचा। स्थानीय जनता में इस बात चर्चा है कि शहर के प्रथम नागरिक महापौर प्रह्लाद पटेल और प्रशासनिक अधिकारी जहां एक तरफ 'जनसंवाद' कार्यक्रमों और रील बनाने में व्यस्त रहे, वहीं दूसरी तरफ आपदा की घड़ी में पीड़ित परिवार के साथ खड़े होने तक नहीं पहुंचे। जनता का आरोप है कि जनहित की बातें और वादे सिर्फ दिखावा साबित हो रहे हैं।
दोस्तों से लगी शर्त बनी हादसे की वजह
बता दें कि रायसेन का रहने वाला सोनू रतलाम में मेले के झूले वालों के साथ काम के सिलसिले में आया था। मिली जानकारी के अनुसार, दोस्तों के बीच कालिका माता मंदिर परिसर के झाली तालाब को तैरकर पार करने की शर्त लगी थी। सोनू शर्त के मुताबिक तालाब में उतरा और आधे रास्ते तक तैरकर गया भी, लेकिन बीच तालाब में ही वह अचानक संतुलन खो बैठा और गहराई में डूब गया।
पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा
हादसे के तुरंत बाद चलाए गए सभी सर्च ऑपरेशन नाकाम रहे और बेबस परिवार को अपने बेटे के शव के लिए दो से ढाई दिनों तक का लंबा और दर्दनाक इंतजार करना पड़ा। फिलहाल पुलिस ने शव को पंचनामा बनाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सोनू की देह अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सुपुर्द कर दी जाएगी