रतलाम तेज़ इंडिया टीवी, (रफीक खान)
रतलाम पुलिस ने दिखाई बहादुरी,समय रहते बचाई एक जिंदगी,।कभी-कभी एक छोटी सी नजर, या एक सही निर्णय और समय पर दिखाया गया साहस किसी की एक पूरी जिंदगी बदल सकता है। रतलाम में हाल ही में ऐसा ही एक जीता जगता उदाहरण देखने को मिला, जिसने यह साबित कर दिया कि पुलिस सिर्फ कानून का पालन नहीं करती, बल्कि संकट की घड़ी में इंसानियत का दम भी दिखाती है।
रतलाम।हाट चौकी पर तैनात प्रधान आरक्षक हेमेन्द्र सिंह राठौर
शाम अपनी ड्यूटी पर थे। तभी उनकी नजर पड़ी एक युवक पर, जो सुभाष नगर ओवरब्रिज पर संकट में फंसा था। युवक के लिए एक पल की देरी जीवन के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकती थी। हेमेन्द्र सिंह ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी जान की परवाह किए बिना युवक की ओर दौड़ लगाई और उसे सुरक्षित बचाया।
घटना की सूचना अपने सीनियर ओर साथी पुलिस कर्मी को दी सूचना मिलते ही चौकी प्रभारी पंकज राजपूत के नेतृत्व में चीता-4 के जवान सुनील डावर और संजय कुशवाह तुरंत मौके पर पहुंचे। पुलिसकर्मियों की तत्परता, सूझबूझ और संयम ने उस पल को सुरक्षित बनाया। उनका समन्वित प्रयास न केवल युवक की जान बचा सका, बल्कि समाज के लिए एक मिसाल भी बन गया की संकट की घड़ी में साहस और संवेदनशीलता ही सबसे बड़ी ताकत होती है।
पुलिस ने युवक को सुरक्षित चौकी लाकर समझाइश दी गई और उसके परिजनों बुलाकर सुपुर्द किया गया। क्षेत्र में ओर स्थानीय लोग आज इस घटना की खूब चर्चा हो रही हैं और लोग इसे मानवता, जिम्मेदारी और बहादुरी का अद्वितीय उदाहरण बता रहे हैं।
इस पूरी घटना ने यह संदेश दिया कि सच्चा नायक वही है जो दूसरों की जिंदगी बचाए, जो संकट में इंसानियत का हाथ थामे। रतलाम हाट की चौकी पुलिस के प्रधान आरक्षक हेमेंद्र सिंह राठौर ने उनकी इस तत्परता ने यह साबित कर दिया कि सख्त पुलिसिंग के साथ संवेदनशीलता और मानवता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
नोट : युवक का नाम कानूनी प्रक्रिया और उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा को देखते हुए प्रकाशित नहीं किया गया है।