रतलाम,(तेज इंडिया टीवी) ।शहर में कई जगह लगे सरकारी ट्यूबवेलों के बिजली के कनेक्शन कटवाने के आदेश देने वाले हिटलर महापौर शायद यह नहीं चाहते कि कुछ जगहों पर इन ट्यूबवेलों के द्वारा यदि साफ पानी उन्हें मुहैया हो रहा है, वो भी ना मिल सके। जिस तरह से दूषित पानीऔर कम दिनों की सप्लाई हो रही है, ऐसे समय पर सरकारी ट्यूबवेल का साफ पानी इन्हें आपातकाल की स्थिति में क्षेत्र वासियों के बहुत ही काम आता है। महापौर प्रहलाद पटेल के हिटलर वाले आदेश के मुताबिक अब तक कई सरकारी ट्यूबवेल के कनेक्शन काटे जा चुके हैं।
जहां पर भी कनेक्शन करते हैं वहां के क्षेत्र वासियों को बोला जा रहा है कि वह यदि इसका इस्तेमाल करना चाहते हैं तो वह खुद समिति बनाकर इस ट्यूबवेल का रखरखाव करें। इससे यह साबित होता है कि निगम अपनी हर तरह की जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहती है और बिजली का बिल नहीं भर पानी से यह भी साबित हो रहा है कि निगम अब कड़की के कगार पर है। वहीं जब से यह हिटलरनुमा आदेश जारी हुआ है और कनेक्शन काटे जा चुके है तभी से लोग अपने जरूरत के सारे कामकाज छोड़कर बिजली विभाग के चक्कर काटने को मजबूर है, बिजली विभाग से उन्हें इतने दस्तावेजों के जमा करने का भार दिया जा रहा है कि जिसमें कई समय लग रहा है। कई लोगों को समिति रजिस्ट्रेशन का अनुभव नहीं है जिससे वे कभी निगम तो कभी बिजली विभाग भटक रहे है।
लेकिन महापौर जी को तो रिल्स बनाने से फुरसत नहीं मिल मिल रही।
बीते दोनों पटरी पार करीब 10 दिनों तक लोग बिना पानी के तरसते रहे। निगम और महापौर की लापरवाही से लोगों को बूंद बूंद के लिए तरसना पड़ रहा है। वही महापौर की इतनी हिम्मत नहीं हुई कि वह लोगों के बीच जाकर उनसे मुलाकात कर सके। पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान के रोज पानी देने के वादे पर निगम प्रशासन खरा नहीं उतर रहा है। अब भी दूषित पानी के साथ दो दिनों के अंतराल में पानी की सप्लाई की जा रही है और बिल प्रति दिन के हिसाब से वसूला जा रहा है। सवाल यह कि जब पानी दो-तीन दिन के अंतराल में दिया जा रहा है तो फिर बिल पानी की सप्लाई के मुताबिक क्यों नहीं लिया जा रहा?
इंदौर में दूषित पानी से हुई 15 से 16 मोटा के बाद से अब रतलाम शहर में भी अफरा तफरी मची हुई है। प्रशासन को लोगों द्वारा दूषित पानी की सप्लाई को लेकर कई बार शिकायत है की गई लेकिन इन शिकायतों को तो प्रशासन ने हवा में उड़ते हुए कहानी तक में रख दिया। जब इंदौर में दूषित पानी से मौत का मामला सामने आया तो प्रशासन नींद से जगा और निरीक्षण पर निकल पड़ा। लेकिन क्षेत्रवासियों द्वारा गंदे पानी के सैंपल के साथ की शिकायतों का क्या?? शायद अब ये हेल्पलाइन नंबर और निरीक्षण कुछ ही दिनों तक चलेगा और फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। फिर लोग शिकायतें ही करते रहेंगे और अधिकार के लिए लड़ते रहेंगे। लेकिन यह भी सच है कि सत्ताधारियों को जनता की समस्याओं और तकलीफ से कोई फर्क नहीं पड़ता।