23 तारीख से मोदी संभालेंगे बिहार में NDA की कमान, PM की 12 चुनावी रैली, कब-कब और कहां, देखें पूरा शेड्यूल

Posted By: Himmat Jaithwar
10/16/2020

पटना। बिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनावी जनसभाओं को लेकर कार्यक्रम तय कर दिया गया है। पीएम मोदी बिहार में कुल 12 चुनावी जनसभाओं को संबोधित करेंगे। बिहार में पीएम नरेंद्र मोदी की जितनी रैलियां होंगी, उसमें सभी सहयोगी दल के नेता मौजूद रहेंगे। सीएम नीतीश कुमार भी सभी रैलियों में शामिल रहेंगे। 23 तारीख को सासाराम में पहली, दूसरी गया और तीसरी भागलपुर में रैली करेंगे। 28 अक्टूबर को दरभंगा में पहली, दूसरी मुजफ्फरपुर और पटना में तीसरी रैली करेंगे। 1 नवंबर को पीएम मोदी फिर आयेंगे। पहली रैली छपरा, दूसरी पूर्वी चंपारण और तीसरी रैली समस्तीपुर में होगी। वहीं 3 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली रैली चंपारण दूसरी सहरसा और तीसरी अररिया में होगी। बिहार भाजपा के चुनाव प्रभारी देवेन्द्र फडणनवीस ने राजधानी पटना में ये जानकारी दी।

इससे पहले एनडीए की ओर से बिहार विधान सभा चुनाव से पहले शुक्रवार को रिपोर्ट कार्ड जारी कर दिया गया। पटना के एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में बीजेपी-जेडीयू और अन्य 2 सहयोगी दल के नेताओँ ने रिपोर्ट कार्ड जारी किया। इस कार्यक्रम में बिहार बीजेपी के चुनाव प्रभारी देवेन्द्र फड़नवीस, रविशंकर प्रसाद, जेडीयू की तरफ से संजय झा एनं अन्य नेता मौजूद रहे। जेडीयू नेता संजय झा ने कहा कि इस प्रदेश मैं हमेशा से जाति के नाम पर वोट मांगा गया, लेकिन नीतीश कुमार ने इसे बदला है। अब विकास के मुद्दे पर वोट की अपील की जाती है। नीतीश कुमार ने 2005 में माइनस से काम शुरू किया था। आज बिहार की क्या स्थिति है किसी से छुपी हुई नहीं है।

वहीं भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि हमारी सोच के केंद्र में है विकास, काम किये हैं और आगे भी करेंगे। एक ओर जनता के प्रति विकास की जिम्मेदारी का भाव और दूसरी ओर अपने परिवार के विकास के प्रति संकल्पित नेता। एक ओर हम नीतीश कुमार के नेतृत्व में किये गए काम की चर्चा कर रहे हैं। आज पटना से किसी भी जगह पर अधिकतम पांच घंटे में जा सकते हैं। 

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि हम तो अपना काम गिना रहे हैं वहीं दूसरी तरफ जो लोग हैं वो अपने बैनर-पोस्टर पर लालू-राबड़ी की तस्वीर नहीं लगा रहे। लेकिन तस्वीर छुपाने से बिहार के लोग वो दिन भूल सकते हैं क्या? क्या अपहरण-लूट हत्या की बात को भूला जा सकता है? 



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