तेनगर सैनिक बना T.I.साहब—प्रमोशन से नहीं, अपने कारनामों से
तेज़ इंडिया टीवी। इन दिनों रतलाम के एक थाना क्षेत्र के एक इलाके में एक नगर सैनिक लोगों की चर्चाओं का विषय बन गया है। उसके अनोखे कारनामों के कारण अब लोगों ने उसको क्षेत्र के T.I. साहब की उपाधि दे दी गई है। लोग बेचारे करते तो भी क्या करते, क्योंकि इस वर्दी वाले भाईजान का इतना रोब जो है कि अगर किसी ने इनकी शान में गुस्ताखी की तो ये उसको कहीं का नहीं छोड़ते।
यह सैनिक पहले भी विवादों में रहा है और कई शिकायतें भी हो चुकी, पर कहते हैं ना कि “ऊपर वाला मेहरबान तो गधा भी
पहलवान
सैनिक के कारनामे ऐसे कि कानून की किताबों से बाहर — या यूं कहे कि इनके कानून की किताब का तो कोई हिसाब ही नहीं, क्योंकि इनकी खुद की एक हिसाब की किताब चलती है। उसको पूरा करो और जाओ, बाकी कोई कुछ नहीं।
क्योंकि क्षेत्र के अघोषित T.I. साहब जो हैं, फिर शायद ये अपने ऊपर के आधीकारियों को भी खुद ही चला रहे होंगे। नाराज़ मत होना श्रीमान — ये हम नहीं, लोग बोल रहे हैं।
ताज़ा मामला
इन साहब के कारनामों का ताज़ा मामला — सैनिक T.I. साहब के एक स्पेशल पिट्ठू ने जानकारी दी कि कुछ लोग चोरी का माल बेच ओर खरीद रहे हैं।खबरी भी उन्हीं में से एक — मतलब चोर-चोर मौसेरे भाई।
फिर क्या था — T.I. सैनिक ने अपनी सेना को तैयार किया और खुद काम पर लग गए। चोर भी पकड़े और चोरी का माल खरीदने वाला भी। पर सभी दूसरे थाना क्षेत्र से — इन सैनिक T.I. साहब के क्षेत्र में ना चोरी हुई और ना चोरी का माल बिका, पर चोरों के साथी मुखबिर ने शायद यह कहा होगा कि दांव फट जाएगी। और मैं खुद आऊंगा तोड़ करने— और हुआ भी।चोरी के आरोप में या चोरी का माल खरीदने के आरोप में चार को उठाया और इनके आका को भी।
मुखबिर का खेल और “हिसाब की किताब शुरू”
अब होती है सैनिक T.I. साहब के सुपर तोड़ करने वाले मुखबिर की बात। भूल तो नहीं गए आप? यह वही मुखबिर है जिसने कहा था कि दांव फट जाएगी।जैसे ही मुखबिर की एंट्री हुई, सैनिक T.I. साहब ने अपने डिजाइन डाली और हिसाब की किताब में 10 की रसीद फाड़ी
— और भैय्यू फ्री।
बाकी तीन और दूसरे थाना क्षेत्र में माल खरीदने वाला आज़ाद अंदाज किस भाव हुए — कब, कहाँ, कैसे — पता नहीं।
पर इन नगर सैनिक T.I. साहब के इस कारनामे की लोगों और क्षेत्र में खूब चर्चा है।लोग बोल रहे हैं — ऐसा भी क्या होता है?
यह वर्दी वाले भाईजान अपने कारनामों से ही नहीं, डिपार्टमेंट की जरूरी जानकारी और अंदर की बातें अपराधियों तक पहुंचाने का काम भी करते हैं और अपने वाले आरोपियों को खुलकर सपोर्ट भी करते हैं।क्योंकि बात हिसाब किताब की होती होगी।
इसी लिए क्षेत्र में सब कुछ इन नगर सैनिक T.I. साहब के हिसाब का ही होता है। इसी लिए अपराभी इनके खास — यानी भाईचारा।
आम जनता परेशान — क्षेत्र की 98% आम जनता इनके कारनामों से परेशान है,।
चलिए इस कहानी को यहीं खत्म करते हैं, आप पढ़ते-पढ़ते थक जाओगे और हम लिखते-लिखते।
नगर सैनिक T.I. साहब के कारनामों की फेहरिस्त इतनी लंबी जो है — और ये अंत भी नहीं।
जल्द हाजिर होंगे इस नगर सैनिक के नए कारनामों के साथ।
हो सकता है कि अगली बार ये एस.पी.साहब ना बन जाएं — तो ये फिर कहलाएंगे “नगर सैनिक एस.पी. साहब”।
कूटरचना नहीं कड़वा सच है।
तेज़ इंडिया सच की तस्वीर